Garhwali Bhasha ar Sahitya ki Vikas Jatra: A Book for Collector’s ChoiceReview of ‘Garhwali Bhasha ar Sahitya ki Vikas Jatra’

Garhwali Bhasha ar Sahitya ki Vikas Jatra : A Book for Collector’s ChoiceReview of ‘Garhwali Bhasha ar Sahitya ki Vikas Jatra’ (2014) by Sandeep RawatCritical and Chronological History of Modern Garhwali (Asian) Poetry –-159 CLiterature Historian: Bhishma Kukreti-Garhwali Bhasha ar Sahitya ki Vikas Jatra (Chaudahvin Sadi bati abari tak Bhasha ar Sahitya ko aitihasik Vikas […]

पहाड़ की संवेदनाओं के कवि कन्हैयालाल डंडरियाल

पहाड़ की संवेदनाओं के कवि कन्हैयालाल डंडरियाल हमारे कुछ साथी उन दिनों एक अखबार निकाल रहे थे। दिनेश जोशी के संपादन में लक्ष्मीनगर से ‘शैल-स्वर’ नाम से पाक्षिक अखबार निकल रहा था। मैं भी उसमें सहयोग करता था। बल्कि, संपादक के रूप में मेरा ही नाम जाता था। यह 2004 की बात है। हमारे मित्र […]

आधुनिक गढवाली भाषा कहानियों की विशेषतायें और कथाकार

आधुनिक गढवाली भाषा कहानियों की विशेषतायें और कथाकार (सौ साल की यात्रा 2011 तक ) – भीष्म कुकरेती- कथा कहना और कथा सुनना मनुष्य का एक अभिन्न मानवीय गुण है . कथा वर्णन करने का सरल व समझाने की सुन्दर कला है अथवा कथा प्रस्तुतीकरण का एक अबूझ नमूना है . यही कारण है कि […]

Bagi ar Upnai Laden

‘बागि-उप्पनै लड़ै’ गढवाली साहित्य के सुप्रसिद्ध साहित्यकार कन्हैयालाल डंडरियाल जी द्वारा रचित खण्डकाव्य है। कन्हैयालाल डंडरियाल एक ऐसे विरले कवि थे जो आज के वैज्ञानिक युग में भी नंगे पैर चलकर धरती के दर्द को आत्मसात् करते हुये आगे बढ़ते थे। इसीलिए उनके साहित्य मे अपनी माटी की सौंधी खुशबू होना स्वाभाविक है।बहराल, ‘बागि-उप्पनै लड़ै‘ […]